बिडिंग के जरिए बिजनेस क्लास की खाली सीटों पर यात्रा कर सकेंगे इकोनॉमी क्लास के यात्री

एयर इंडिया के इकोनॉमी क्लास के यात्री कुछ अतिरिक्त किराया देकर अपना टिकट बिजनेस क्लास में अपग्रेड करवा सकेंगे। इसके लिए एयरलाइन ने बिडिंग सिस्टम शुरू किया है। ज्यादा बोली लगाने वाले यात्रियों को प्राथमिकता देते हुए बिजनेस क्लास की खाली सीटें अलॉट की जाएंगी। सबसे कम बिडिंग के लिए अधिकतम 75% की लिमिट लागू होगी। यानी बिजनेस क्लास के वास्तविक किराए से 75% तक कम राशि के लिए बोली लगाई जा सकेगी।

अगर किसी यात्री को 6774 रुपए की बिड में बिजनेस क्लास की टिकट मिलती है तो यह राशि इकोनॉमी क्लास के लिए बुक कराए गए उसके टिकट के अतिरिक्त होगी

चेक-इन के वक्त टिकट अपग्रेड का स्टेटस पता चलेगा
पैसेंजर flightservices.airindia.in पर जाकर ऑनलाइन बिड फाइल कर सकते हैं। एयरपोर्ट पर चेक-इन के वक्त पैसेंजर को यह पता चल पाएगा कि उनका टिकट अपग्रेड हुआ है या नहीं। अपग्रेड नहीं होने पर पैसेंजर को 5 दिन में अतिरिक्त पैसे लौटा दिए जाएंगे।

बिजनेस लाइट नाम से यह स्कीम देश के 6 मेट्रो शहरों की उड़ानों और अंतरराष्ट्रीय फ्लाइट्स के लिए शुरू की गई है। यूएस, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, जापान और हॉन्गकॉन्ग की उड़ानों के लिए बिजनेस लाइट योजना लागू होगी। खाड़ी देशों की उड़ानों के लिए फिलहाल इसे शुरू नहीं किया गया है।

एयर इंडिया को उम्मीद है कि बिजनेस लाइट स्कीम से यात्रियों के साथ-साथ एयरलाइन को भी फायदा होगा। एयर इंडिया हर रोज 72,000 सीटों की क्षमता वाली फ्लाइट्स का संचालन करती है। इनमें 4,500 सीटें बिजनेस क्लास की होती हैं।

इंद्रा नूयी वर्ल्ड बैंक की अध्यक्ष बनती हैं तो इतिहास में पहली बार ऐसा होगा कि कोई गैर-अमेरिकी यह जिम्मेदारी संभालेगा।

भारतीय मूल की इंद्रा नूई अमेरिका की प्रमुख फूड एंड ब्रेवरेज कंपनी पेप्सीको की पहली महिला सीईओ चुनी गईं थीं। बतौर सीईओ नूई के 12 साल के कार्यकाल में पेप्सीको के रेवेन्यू में 81% तक इजाफा हुआ। नूई ने पिछले साल 3 अक्टूबर को सीईओ का पद छोड़ दिया था।

वर्ल्ड बैंक के अध्यक्ष पद पर अब तक अमेरिकी और आईएमएफ के अध्यक्ष पद पर यूरोपियन ही चुने जाते रहे हैं। ऐसा अमेरिका और यूरोप के बीच हुए गैरआधिकारिक समझौते के तहत होता रहा है। 

वेबसाइट के मुताबिक, अगर ट्रम्प इंद्रा नूयी जैसी भारतीय मूल की बेहद काबिल उम्मीदवार को नॉमिनेट करते हैं तो यूरोपियन स्वाभाविक तौर पर इसका समर्थन करेंगे। क्योंकि, अभी तक उनके लिए दोनों पक्षों में चलने वाला सहयोगात्मक सिद्धांत काम का रहा है।

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